राधेश्याम राधेश्याम जपत रहs
राधा नाम मिसरी, उहे हउवें श्याम जी
आपन ई उमिरिया, तू कदs उनके नाम जी
चार दिन के जिनगी बा, नेह लगालs भव से नईया ई पार लगालs
चाहे जवन राह फेर (चलत रहs)2
(राधेश्याम राधेश्याम कहत रहs जहां रहs ये मन रटत रहs)2..
कोरस:
(राधेश्याम राधेश्याम कहत रहs
जहां रहs ये मन रटत रहs)2..
राधा नाम के महिमा, जग में अपार हो
श्याम जी के जाप ही, मुक्ति के द्वार हो
रात दिन सुमिरन में मन के डुबालs
सफल जिन्दगानी आपन तू बनालs
भक्ति रस धारा में तू (बहत रहs)2
(राधेश्याम राधेश्याम कहत रहs
जहां रहs ये मन रटत रहs)2..
कोरस:
(राधेश्याम राधेश्याम कहत रहs
जहां रहs ये मन रटत रहs)2