“जीजा आजा ससुरारी हो”
“होली”
मुखड़ा:
फीमेल:
तू हू तरसबs उहवा, हमरो के तरसईबs
फागुन में छुछे कटी ,कुछू नाही पईबs
मूड बनालs आपन,हमहु बानी तईआरी में
कि गोर गोर गलिया मले ये जीजा,आजा ससुरारी में..
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अंतरा:1
खिलल बा देहिया जईसे,महके गुलाब हो
हमरा में नासा जेतना,का होई सराब हो
रंग डाल के रंगीन बनईहs
अपना साली के मस्ती में डुबईहs
खूबे लगईहs धके,भर अकवारी में
कि गोर गोर गलिया मले ये जीजा,आजा ससुरारी में.
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अंतरा:2
छुवते तू हमरा के, जईबs गरमाई हो
साच कहिले ये जीजा,बड़ा माजा आई हो
करs नाही देरी,जल्दी से आजा
रांगवा से हमरा, सगरो बोथा जा
रंगीन होई जीयरा, खुबे पारा पारी में
कि गोर गोर गलिया मले ये जीजा,आजा ससुरारी में.
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फणिन्द्र राव(गीतकार)
Video Director – Rajesh
Sonu Editor – Santosh Rishu
Crafted & Produced by – Radium Arts