
डूबते सुरुज के पूजा होला
मुखड़ा:
केतना सरधा भक्ति बाटे
अटले से ना जिया में आटे
इनकर महिमा दुनिया जाने
कहिले गीतिया गाई के
उगते सुरुज के डूबते सुरुज के भी,पूजा होला छठी माई के…….
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अंतरा:1
उगत सुरुज के सब केहू पूजे, डुबत सुरुज ना भावे हो
अस्त सुरुज के छठ परब में हीं,सबकेहू सीस झुकावे हो
आस्था के ई पावन परब, देला मन हरसाईके
उगते सुरुज के डूबते सुरुज के भी,पूजा होला छठी
माई के….
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अंतरा:2
सुरुज देव के अइसन पूजन,छठ परब में ही होखेला
सारा जगत के लोगवा नजारा, अइसे में ई देखेला
जन जन में ई भक्ति भाव, देला सबके जगाईके
उगते सुरुज के डूबते सुरुज के भी,पूजा होला छठी
माई के……
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अंतरा:3
छठ मईया के सारा बरती,जाये ऊ छठी घाटे हो
जे ना भूखे छठ परबिया, ऊहो रहेला साथे हो
सबके मांगल होला फलित हो,रहे जे असरा लगाईके
उगते सुरुज के डूबते सुरुज के भी,पूजा होला छठी
माई के….
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फणिन्द्र राव(गीतकार)
FANINDRA RAO (LYRICIST)