
घरवा बोलालीं छठी मईया
मुखड़ा:
मेल:
हम दूर देस में बानी, येहि बात के बा परेसानी
पर साल भी सोच के ना आ पवनी
अभी ले हहरत बानी
बड़ी ललसा लाग़ल बाटे, ई मनवा में हमार
येह छठ परब में घरवा बोलालीं
रउरा से करीलें गुहार, हे छठी मईया
रउरा से करीलें गुहार…
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अंतरा:1
छठी घाट पर मईया,पोखरा खोनवाइब
सारा बरती खातिर सिरसोपता बनवाइब
इंतिजाम में कवनो,कमी ना होई
राउर सेवा भक्ति,जी भर के होई
बेटवा के अरजी रउरा,कर लिही स्वीकार
येह छठ परब में घरवा बोलालीं
रउरा से करीलें गुहार, हे छठी मईया
रउरा से करीलें गुहार.
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अंतरा:2
हमरे भखवती माई,करे छठ परबिया
सुपली सर समान सगरो, लईती जा बजरिया
माई के संघवा,ठेकुवा पकवइती
माथे पर दउरा,हम उठा के जईति
कोसिया भराइत अंगना में, राऊर होइत जय जयकार
येह छठ परब में घरवा बोलालीं
रउरा से करीलें गुहार, हे छठी मईया
रउरा से करीलें गुहार.
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अंतरा:3
माई से कहले रहनी, साड़िया ले आईब
लइकन सेयान ला,कपड़ा बनवाइब
सभे जोहत होई,बबुआ कब अइहे
लागता येहू साल,हमनी के तरसईहे
सबके सहाई हईं ये माई,हमरो पे करी उपकार
येह छठ परब में घरवा बोलालीं
रउरा से करीलें गुहार, हे छठी मईया
रउरा से करीलें गुहार.
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फणिन्द्र राव(गीतकार)